Friday, 4 January 2013

भागवत के रामराज्य में स्त्री और गाय की आज़ादी की परिधि



एक 

भागवत का संघ जिस रामराज्य का कल्पना करता है... 
उसमें पुरुष उत्तम होगा
और स्त्री सीता... 
समाज दो हिस्सों में बंटा होगा... 
एक पर रावण का कब्ज़ा होगा
दूसरे पर राम का...

फिर जो नया समाज बनेगा
यानी रामराज्य का निर्माण होगा
जिसमें सभी पुरुषों को
'निक्कर पहनना,टोपी लगाना और लाठी' रखना अनिवार्य होगा
लड़कियों को स्कर्ट पहनने पर परम्परा,संस्कार,मूल्य
और समाज विद्रोही माना जायेगा...
महिलाओं को एक हाथ का 'घूँघट' काढ़ने की अनिवार्यता होगी....

स्त्री,गाय और गाय,स्त्री की तरह खूंटे में बंधीं होगी...
यहीं उसके आज़ादी की परिधि होगी...

DRY/04/01/2013/09.36.pm


दो 


पूंछ आयोग ! 

इसके पूंछ में आग लगा दो 
नहीं...नहीं... 
इसके पूंछ को ही काट दो
अरे नहीं भाई रुको 
क्या आदिम फार्मूला अपना रहे हो 
इसके पूंछ को 
कुछ साल के लिए रस्सी से बांध दो 
क्या बकवास है
यह तो सामंतवादी फार्मूला है
इसका बहुत सरल इलाज है
रासायनिक दवा का इस्तेमाल करो
पूंछ ही नहीं उगेगी
क्यों गोल-गोल घुमा रहें हैं
20 बीसवीं सदी के फार्मूले को
21 वीं सदी में आजमा रहे हो
तब क्या होना चाहिए
मेरा खयाल है
एक आयोग बना देना चाहिए
यह क्या करेगा
यह बताएगा
पूंछ का क्या किया जाए

DRY/04/01/2013/06.47.pm

1 comment:

Rohitas ghorela said...

दोनों प्रस्तुतियां बेहद गजब की लगी ... दोनों एक तंज़ छोडती हैं

recent poem : मायने बदल गऐ